Saturday, 12 August 2017

2-535 सारी दुनियां सोई होती है

सारी दुनिया सोई होती है, तब भी सूरज काम करता रहता है,
मौसम के कुफ्र में भी सरहद पर जवान काम करता रहता है...(वीरेंद्र)/2-535


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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