Monday, 31 July 2017

2-533 महज़ चंद तकलीफों

महज़ चंद तकलीफों पर ही इंसाँ ने खामखां हो-हल्ला मचा रक्खा है,
वो नहीं जानता ऊपर वाले ने उसे कितनी मुसीबतों से बचा रक्खा है..(वीरेंद्र)/2-533


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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