Saturday, 29 July 2017

2-527 अच्छा हुआ फासले हो

अच्छा हुआ फ़ासले हो गए तो कुछ फैसले भी हो गए,
मंज़िल के पहले ही राहें बदलने के सिलसिले भी हो गए..(वीरेंद्र)/2-527


रचना: वीरेंद्र सिन्हा जो  "अजनबी"

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