Wednesday, 5 July 2017

2-525 मेरे मुल्क के गिद्ध भी

मेरे मुल्क के गिद्ध भी हर किसी को नहीं निगलते हैं,
वो भी जानते हैं इस धरती पर कुछ गद्दार भी पलते हैं..(वीरेंद्र)/2-525


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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