Wednesday, 5 July 2017

2-524 हिकारत से न देख

हिक़ारत से न देख दहलीज़ के सवाली को,
न जाने कब किसका किरदार बदल जाये..(वीरेंद्र)/2-524


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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