Wednesday, 19 July 2017

1-947 तुम आकर कानों में

तुम आकर कानों में ऐसा क्या कह गए,
आंखें खुल गईं, अरमानों के आंसू बह गए..(वीरेंद्र)/1-947


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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