Wednesday, 5 July 2017

1-943 ख्वाहिश,हसरत,आस,

ख्वाहिश, हसरत, आस, उम्मीद, आरज़ू और तमन्ना,
हर रोज़ लिख रहे हैं ये, ज़िन्दगी का एक और पन्ना..(वीरेंद्र)/1-943


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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