Wednesday, 5 July 2017

1-941 मै बिखरा हुआ मोती नहीं,

मै बिखरा हुआ मोती नहीं जो तुम उठा लो बिखर जाने के बाद,
टूटा हुआ दिल हूँ, कोई कीमत नहीं जिसकी, टूट जाने के बाद..(वीरेंद्र)/1-941

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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