Tuesday, 27 June 2017

2-529 सियासतदानों, सियासती दांवपेंच

सियासतदानों, सियासती दांवपेंच क्यों चलाए रखते हो,
शांत शहर को और पुलिस थानों को जलाए रखते हो,
समझौता कोई होने नहीं देते सरकार और किसानों में,
शहरों से भीड़ लाकर गाँवों में, मौहाल गरमाए रखते हो..(वीरेंद्र)/2-529

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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