Saturday, 17 June 2017

2-528 भावनाएं किसी काम की

भावनाएं किसी काम की नहीं, ये कभी समझी नहीं जा सकतीं.,
शब्द-भण्डार कम पड़ जाते हैं, कभी व्यक्त की नहीं जा सकतीं,
दिल से निकाल कर फेंक देना ही अच्छा है इनका इस ज़माने में,
ऐसा भी नहीं है कि जिंदगियां इनके बिना जी नहीं जा सकतीं ..(वीरेंद्र)/2-528

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment