Saturday, 17 June 2017

2-522 भारतमाता हम तुझसे

भारत माता हम तुझसे शर्मिंदा हैं,
तेरे दोषी इतनी शान से जिंदा हैं..(वीरेंद्र)/2-522

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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