Saturday, 17 June 2017

1-937 कुछ लोग सामान-ऐ-

कुछ लोग सामान-ऐ-दिलबस्तगी होते हैं,
नहीं रहते जब काम के, तो अजनबी होते हैं..(वीरेंद्र)/1-937

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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