Sunday, 11 June 2017

1-935 तेरा उसे भूल जाना

उसको भूल जाना तेरे लिए नामुमकिन था ऐ "अजनबी",
शुक्र मना वो खुद ही बदल गया और ये मुमकिन हो गया..(वीरेंद्र)/1-935

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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