Wednesday, 3 May 2017

2-519 हर इंसान खुद ही

हर इंसान खुद ही खोया हुआ है कहीं,
और पूछता है ये इंसान कहाँ खो गए..(वीरेंद्र)/2-519

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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