Monday, 15 May 2017

1-930 दुनियां-जहाँ को ज़ख्म न दिखा,

दुनियां-जहाँ को ज़ख्म न दिखा, सबके पास "मरहम" नहीं होता,
नमक छिड़क देते हैं लोग उनपर, उनको कोई भी गम नहीं होता..(वीरेंद्र)/1-930

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" 

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