Wednesday, 17 May 2017

1-929 वो प्यार, प्यार ही क्या

वो प्यार, प्यार ही क्या, जिसमे आँखें नम न हों,
वो भला निखरेगा क्या, अगर उसमे ग़म न हों..(वीरेंद्र)/1-929

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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