Monday, 15 May 2017

1-928 वक्त-ऐ-दौरां में एहसास

वक्त-ऐ-दौरां में एहसास-ओ-जज़्बात दिलों से ऐसे निकल गए,
पता नहीं चलता जिंदगी में कौन आए, कब और कैसे निकल गए..(वीरेंद्र)/1-928

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"






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