Saturday, 13 May 2017

1-926 पता नहीं मकतल पर

पता नहीं मक़तल पर हूँ कि मैखाने पर हूँ
अब जहां भी हूँ, बस मैं तेरे निशाने पर हूँ..(वीरेंद्र)/1-926


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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