Wednesday, 3 May 2017

1-923 तेरे आने से भी कम

तेरे आने से भी कम न होंगे मेरे ग़म,
एक तन्हाई ही तो बस मेरा ग़म नहीं..(वीरेंद्र)/1-923


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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