Sunday, 7 May 2017

1-922 तु पत्थर थी, मै भी

तू पत्थर थी, मै भी पत्थर हो गया हूँ,
तू एक प्रश्न थी, मै तेरा उत्तर हो गया हूँ. (वीरेंद्र)/1-922

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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