Monday, 15 May 2017

0-602 परिंदे गए, घोंसला

परिंदे गए, घोंसला खाली है,
होरही उदास डाली-डाली है,
पत्ता-पत्ता थरथराने लगा है,
शायद, खिज़ा आने वाली है..(वीरेंद्र)/0-602


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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