Monday, 17 April 2017

2-516 गद्दारों की गद्दारी, वतनपरस्त

गद्दारों की गद्दारी, वतनपरस्त कभी ना बर्दाश्त करेंगे,
उठा लेंगे शमशीर खुद ही, गर हुक्मरां नज़रंदाज़ करेंगे..(वीरेंद्र)/2-516


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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