Wednesday, 12 April 2017

2-514 सब मिथ्या है जो है

सब मिथ्या है जो है जग-बीती,
सत्य वही है जो है आप-बीती..(वीरेंद्र)/2-514


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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