Friday, 28 April 2017

2-510 दुश्मन के सर उडाए

दुश्मन के सर उड़ाए नहीं, तो झुकाए तो जा सकते हैं,
पड़ोसी अगरचे बदले नहीं, तो सुधारे तो जा सकते हैं.

शहीदों पर दुश्मन के हमलों की मज़म्मत है नाकाफी,
नाकारा हों अगर हुक्मरां, तो हटाये तो जा सकते हैं..(वीरेंद्र)/2-510


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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