Monday, 17 April 2017

1-914 वापस लौट आए हैं तमाम

वापस लौट आए हैं तमाम रंज-ओ-गम मेरे,
खोए हुओं की बड़ी तलाश जो रहती थी मुझे.(वीरेंद्र)/1-914


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" 

No comments:

Post a Comment