Wednesday, 5 April 2017

1-911 बेदर्द हैं लोग,

बेदर्द हैं लोग, शक-ओ-शुबहा में उंगली उठाते हैं,
जाने क्यों मुहब्बत का मतलब वो एक ही लगाते हैं..(वीरेंद्र)/1-911

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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