Wednesday, 5 April 2017

1-910 फिर से कोई दर्द

फिर से कोई दर्द, सर उठा रहा है,
कौन है जो इसे शह देके जा रहा है..(वीरेंद्र)/1-910

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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