Monday, 24 April 2017

0-597 चुराए जा सकते हैं हीरे

चुराए जा सकते हैं हीरे जवाहरात मेरी शायरी के,
इल्म, हुनर, ख्यालात मेरे चुराए नहीं जा सकते,
चुराके पढ़े तो जा सकते हैं महफिलों में मेरे शेर,
दिलो-जिगर में हाज़रीन के उतारे नहीं जा सकते.(वीरेंद्र)/0-597

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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