Wednesday, 12 April 2017

0-596 तुमको देखा नहीं बहुत

तुमको देखा नहीं बहुत दिनों से,
कुछ लिक्खा नहीं बहुत दिनों से,
जाने कब पूरी होगी मेरी ग़ज़ल,
दर्द कोई उठा नहीं बहुत दिनों से..(वीरेंद्र)/0-596


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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