Wednesday, 12 April 2017

0-595 पत्थर दिल कभी ग़मज़दा

पत्थरदिल कभी ग़मज़दा नहीं होता,
गैर-जज़्बाती कभी तन्हा नहीं होता,
एहसासात का मारा हुआ मेरा दिल,
'अजनबी' ही रहा शनासा नहीं होता..(वीरेंद्र)/0-595


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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