Wednesday, 29 March 2017

2-513 मानते हैं सब ही

मानते हैं सब ही, मन स्थिर नहीं चंचल होता है,
तो कोई बताए हमें 'मनचला' बुरा कैसे होता है..(वीरेंद्र)/2-513


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment