Tuesday, 28 March 2017

2-507 नेकी, इंसानियत की राह

नेकी, इंसानियत की राह में रोड़े आते हैं,
कई मासूमों के नेक दिल तोड़े जाते हैं,
भाई चारा दुनियां से ना उठा है न उठेगा,
कुछ लोग बस यूँ ही मूछें मरोड़े जाते हैं..(वीरेंद्र)/2-507


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment