Tuesday, 28 March 2017

2-501 इधर न निगाह डालो

इधर न निगाह न डालो ख़िज़ाओं मेरा मुल्क रंगबिरंगा बगीचा है,
यूँही नहीं फूल खिले हैं इसमें, शहीदों ने अपने खूँ से इसे सींचा है..(वीरेंद्र)/2-501


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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