Friday, 31 March 2017

1-906 बुढापे का माकूल एहसास

बुढ़ापे का माकूल एहसास नहीं होता खुदके बूढ़े होने तक,
जवान औलाद से कोई तवक्को न रख उनके बूढ़े होने तक..(वीरेंद्र)/1-906


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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