Wednesday, 29 March 2017

1-904 मुझसे मुहब्बत नहीं

मुझसे मुहब्बत नहीं, तो जुदा होके रोया क्यों था,
सींचना नहीं था, तो इस पौधे को बोया क्यों था..(वीरेंद्र)/1-904


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment