Tuesday, 28 March 2017

1-902 ज़िन्दगी तेरे लिय ही

ज़िन्दगी तेरे लिए ही सपने मैं सजाए रखता हूँ,
तू है उधार की फिरभी सीने से लगाए रखता हूँ..(वीरेंद्र)/1-902


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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