Tuesday, 21 March 2017

1-896 शानों पर बिखरी

शानों पर बिखरी आपकी ये ज़ुल्फ़ें गुलबर्ग लगती हैं,
नाज़ां हूँ दीद पर, आप सर से पांव गुलमर्ग लगती हैं..(वीरेंद्र)/1-896


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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