Wednesday, 8 March 2017

1-894 हवा के झोंके मेरे चराग

हवा के झोंके मेरे चराग़ को ज़्यादा देर जलने नहीं देंगे,
तू भी चली जा ख़ुशी, मेरे गम तुझे और यहाँ रहने नहीं देंगे..(वीरेंद्र)/1-894


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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