Wednesday, 1 March 2017

1-890 गम नहीं जो तुमने मुझे

ग़म नहीं जो तुमने मुझे दो चार ग़म भी दे दिए,
आखिर इतनी खुशियां भी मेरे किस काम की थीं..(वीरेंद्र)/1-890


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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