Monday, 27 March 2017

0-593 तुझे अगर मुझसे मुहब्बत

तुझे अगर मुझसे मुहब्बत नहीं,
तो बता जुदा होकर रोया क्यों था,
सींचना नहीं था इस पौधे को,
तो भला तुमने उसे बोया क्यों था..(वीरेंद्र)/0-593


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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