Friday, 24 February 2017

2-503 गधे को गोद में

गधे को गोद में बिठा लो, तो गधे का क्या कसूर,
कौव्वे को मोती खिलाओ तो कौव्वे का क्या कसूर, 
मूर्खों को खुद ही शौक हो अगर गर्त में डूबने का, 
तो बोलिए, फिर इसमें डुबाने वाले का क्या कसूर .(वीरेंद्र)/2-503

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी".

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