Friday, 24 February 2017

2-504 सहिष्णुता छोड़, असहिष्णु

सहिष्णुता छोड़, असहिष्णु बन जाना चाहता हूँ,
देश के गद्दारों को सबक मै सिखाना चाहता हूँ,
मेरे देश की शान के खिलाफ बोलने वालों की, 
आग उगलती जुबां अब मै खींच लेना चाहता हूँ..(वीरेंद्र)/2-504

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