Saturday, 25 February 2017

2-500 बोलने की और भोंकने की

बोलने की और भोंकने की आज़ादी में बड़ा फर्क होता है,
जो न समझा इसको, एक दिन उसका बेड़ा गर्क होता है..(वीरेंद्र)/2-500


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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