Saturday, 18 February 2017

2-497 सियासतदानों ने हर सिम्त

सियासतदानों ने हर सिम्त मसले बड़े उलझा रक्खे हैं,
ज़ुबाँ से निकले अलफ़ाज़ नफरतों के ज़हर में बुझा रक्खे हैं..(वीरेंद्र)/2-497


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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