Friday, 24 February 2017

2-494 कोई नहीं रहा असल में

कोई नहीं रहा असल में मेरे वोट के काबिल,
जिसको दिया वो भी हो गया धूर्तों में शामिल,
मुल्क सरक रहा है बस यूँ ही चींटी की तरह,
हरेक मशगूल लूटने में, जनता हुई है ग़ाफिल..(वीरेंद्र)/2-494


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment