Saturday, 18 February 2017

1-880 तेरी खुशबू तेरा मुकम्मल

तेरी खुशबू तेरा मुकम्मल पता देती है मुझे,
तेरी आमो-दरफ्त की इत्तिला देती है मुझे..(वीरेंद्र)/1-880


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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