Saturday, 11 February 2017

1-878 तमाम उम्र बिन जिए ही

तमाम उम्र बिन जिए ही ज़िन्दगी गुज़ार दी हमने,
तुम्हे पाने के बाद अब जीने की आदत हो रही है..(वीरेंद्र)/1-878


वीरेंद्र सींह "अजनबी"

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