Monday, 6 February 2017

1-873 मुद्दत हो गई जाने कहाँ

मुद्दत हो गई जाने कहीं खो गया वो ज़माना,
अब भी दिल नहीं मानता, बदल गया वो ज़माना..(वीरेंद्र)/1-873


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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