Monday, 6 February 2017

1-872 मेरे जुनूं को देख

मेरे जुनूँ को देख, अंदाज़े बयाँ को न देख,
इश्क़ बेपढ़ा होता है उसकी ज़ुबाँ को न देख..(वीरेंद्र)/1-872


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment