Wednesday, 1 February 2017

1-871 नज़दीक आओ कि

नज़दीक आओ कि जज़्बात का उफ़ान आ जाए,
इस क़दर भी नहीं, कि साँसों में तूफ़ान आ जाए..(वीरेंद्र)/1-871


©रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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